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श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

हरे कृष्णा ! हरे रामा !

श्रीमदभागवद्गीता एक ऐसी रचना है जो मनुष्य का सर्वकालीन सर्वश्रेष्ठ मित्र - मार्गदर्शक है !  श्रीमदभागवद्गीता का उपदेश महाभारत युद्ध के समय में कुरुक्षेत्र की भूमि पर भगवांन श्री कृष्णजी ने अर्जुन को दिया था ! व्यवहारिक दृष्टिसे केवल श्रीमदभागवद्गीता ही ऐसा ज्ञान है जिसे जानने के पश्चात सरल-सुखी जीवन व्यतीत करने के लिए अन्य किसी ज्ञान को जानने की जरूरत ही नहीं बचती ! यदी आप यह अनुभव करले की आप वास्तव में एक आत्मा है, शरीर तो केवल एक आवरण मात्र है तो आप स्वयं को श्रीमदभागवद्गीता की एक एक बात पर विश्वास करने से नहीं रोक सकते !

हम सभी आत्माए है, जो परमात्मा के अंश है. और यह संसार एक कारागृह है जिसमे हम अपने अपराधों के दण्ड़को भोगने हेतु जन्म लेते है. यह जीवन मनुष्य के लिए एक अवसर है अपने अपराधों का प्राश्चित करने का, इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए एकमात्र अभ्यास उपयुक्त है और वो है श्रीमदभागवद्गीता !

श्रीमदभागवद्गीता में कर्मयोग,भक्तियोग, राजयोग और ज्ञानयोग का वर्णन है ! जब मनुष्य शरीर द्वारा कर्म करके परमात्मा के साथ योग करता है तो उसे "कर्मयोग" कहा जाता है ! कर्मयोग में मनुष्य सदैव परमांत्मा द्वारा बताये गए नियमोका पालन करते हुवे कर्म करता है !

भगवान कहते है की यदि कोई मनुष्य स्वयं को मुझे समर्पित कर दे तो उसे में प्रसन्नता पूर्वक स्वीकार करता हु और उसे अपनी शरण में ले लेता हु ! भगवान की और ऐसे समर्पण को "भक्तियोग" कहा गया है !

श्रीमदभागवद्गीता में भगवान् ने कहा है की यदि कोई मनुष्य ध्यान की उस स्तरपर पहुंच जाये जहा वो सभी चक्रो को सिद्ध करके कुंडलिनी जागृत करले तो वो परमात्मा से योग कर सकता है, इसे "राजयोग" कहा गया है !

जब मनुष्य को अपने अस्तित्व के विषय में जानने की जिज्ञासा होती है और वो अध्यात्म के अभ्यास से ज्ञान प्राप्त करता है और फिर परमात्माके साथ योग करता है उसे "ज्ञानयोग" कहते है !

श्रीमदभागवद्गीता में भगवन श्री कृष्णजी ने जीवन के जो राज अर्जुन को बताये है यदी उसका अनुसरण किया जाये तो मनुष्य जीवन और मृत्यु की चक्र से मुक्ति प्राप्त कर सकता है ! परन्तु कलयुग के प्रत्येक चरण पर मनुष्य जीवन निम्नतर स्थानपर जा रहा है ! कलयुग में आधुनकिकरण के प्रभाव में धर्म का महत्व और भगवान के अस्तित्व पर विश्वास लुप्त होता जा रहा है !

जो मनुष्य कलयुग में भी भगवांन के दिए इन उपदेशो का पालन करते है वे उद्धार की राह पर अग्रेसर होते है ! कुल १८ अध्यायो में ७०० श्लोको के माध्यम से मनुष्य ऐसी संतुष्टि और प्रसन्नता प्राप्त कर लेता है जो संसार में कही भी नहीं प्राप्त की जा सकती ! भगवान को कैसे प्राप्त करे यह राह भी श्रीमदभागवद्गीता आपको बताती है. जो ज्ञान हम सबसे दूर है उसे पुनः आपके सामने अत्यंत सरल और स्पष्ट भाषा में इस https://www.shrimadbhagwatgita.com के माध्यम से प्रस्तुत करने का हम प्रयास कर रहे है !

तो आइये श्रीमदभागवद्गीता (ShrimadBhagwadGita) के द्वारा मनुष्य जीवन रहस्यों को समझकर जीवन सार्थक बनाये !

|| संपूर्ण अध्याय ||

अर्जुनविषादयोग
अर्जुनविषादयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय एक  Arjunvishadyog - Bhagwat Geeta Chapter 1
सांख्ययोग
सांख्ययोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - द्वितीय  Sankhyyog - Bhagwat Geeta Chapter 2
कर्मयोग
कर्मयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय तीन Karmyog - Bhagwat Geeta Chapter 3
ज्ञानकर्मसंन्यासयोग
ज्ञानकर्मसंन्यासयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय चार GyanKarmSanyasYog - Bhagwat Geeta Chapter 4
कर्मसंन्यासयोग
कर्मसंन्यासयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता- अध्याय पाँच KarmSanyasYog - Bhagwat Geeta Chapter 5
आत्मसंयमयोग
आत्मसंयमयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय छः AtmSanyamYog - Bhagwat Geeta Chapter 6
ज्ञानविज्ञानयोग
ज्ञानविज्ञानयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय सात GnyanVignyanYog - Bhagwat Geeta Chapter 7
अक्षरब्रह्मयोग
अक्षरब्रह्मयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय आठ AksharBrahmaYog - Bhagwat Geeta Chapter 8
राजविद्याराजगुह्ययोग
राजविद्याराजगुह्ययोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता- अध्याय नौ Rajvidyarajguhyayog - Bhagwat Geeta Chapter 9
विभूतियोग
विभूतियोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता- अध्याय दस VibhutiYog - Bhagwat Geeta Chapter 10
विश्वरूपदर्शनयोग
विश्वरूपदर्शनयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय ग्यारह VishwaRoopDarshanYog - Bhagwat Geeta Chapter 11
भक्तियोग
भक्तियोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता- अध्याय बारह BhaktiYog - Bhagwat Geeta Chapter 12
क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग
क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय तेरह Kshetra-KsetrajnayVibhagYog - Bhagwat Geeta Chapter 13
गुणत्रयविभागयोग
गुणत्रयविभागयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय चौदह GunTrayVibhagYog - Bhagwat Geeta Chapter 14
पुरुषोत्तमयोग
पुरुषोत्तमयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता- अध्याय पंद्रह PrushottamYog - Bhagwat Geeta Chapter 15
दैवासुरसम्पद्विभागयोग
दैवासुरसम्पद्विभागयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता- अध्याय सोलह DaiwaSurSampdwiBhagYog - Bhagwat Geeta Chapter 16
श्रद्धात्रयविभागयोग
श्रद्धात्रयविभागयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय सत्रह ShraddhaTrayVibhagYog - Bhagwat Geeta Chapter 17
मोक्षसंन्यासयोग
मोक्षसंन्यासयोग - श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय अट्ठारह MokshSanyasYog - Bhagwat Geeta Chapter 18
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